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28 जनवरी 2026

संदीप सोरल प्रदेश कोंग्रेस खेल प्रकोष्ठ में प्रदेश महासचिव नियुक्त

 

संदीप सोरल प्रदेश कोंग्रेस खेल प्रकोष्ठ में प्रदेश महासचिव नियुक्त
कोटा 28 जनवरी, प्रदेश कोंग्रेस खेल प्रकोष्ठ अध्यक्ष अमीन पठान ने कोटा के संदीप सोरल को प्रदेश महासचिव नियुक्त करते हुए बढ़ी ज़िम्मेदारी दी है, संदीप सोरल ने इस नियुक्ति पर प्रदेश अध्यक्ष अमीन पठान का आभार जताते हुए कहा कि वह अपने पदीय कर्तव्य की कसौटी में समर्पण भाव से कार्य करेंगे, सण्डीला सोरल क्रिकेटर रहे हैं , वोह डायमंड क्रिकेट क्लब की तरफ से कई क्रिकेट मैच खेले है, जबकि टेबल टेनिस के भी बेस्ट खिलाड़ी रहे हैं, संदीप सोरल , छात्र जीवन से ही महाविद्यालय स्तर पर सक्रिय रहे हैं, सन्दीप सोरल छात्र कोंग्रेस एन एस यू आई, यूथ कोंग्रेस में प्रदेश पदाधिकारी रहे, वोह कोटा देहात कोंग्रेस में उपाध्यक्ष, राजस्थान प्रदेश कोंग्रेस कच्ची बस्ती में प्रदेश महामंत्री रहे, सन्दीप सोरल ने अमीन पठान का आभार जताते हुए कहा कि कोंग्रेस के बैनर तले, युवाओ, छात्र, छात्राओं, खेल प्रतिभाओं में जागरूकता कार्यक्रम चलाएंगे, सन्दीप सोरल की इस नियुक्ति पर प्रदेश कोंग्रेस विधि विभाग के को कॉर्डिनेटर अख्तर खान अकेला, ज़िला विधि विभाग अध्यक्ष पदम् गौतम, वक़्फ़ कमेटी सदर सरफ़राज़ अंसारी, मुन्ना भाई, मनीष शर्मा, एडवोकेट आशिक़ शेख, रितेश सोरल , यूथ कोंग्रेस के सोहेल खान, श्रीमती प्रकृति सोरल, सोनिका सोरल, नीता सोरल सहित सभी नें उन्हें बधाई दी है,

और न छाँव (बेहिश्त) और धूप (दोज़ख़ बराबर है)

 और न छाँव (बेहिश्त) और धूप (दोज़ख़ बराबर है) (21)
और न जि़न्दे (मोमिनीन) और न मुर्दें (क़ाफिर) बराबर हो सकते हैं और खु़दा जिसे चाहता है अच्छी तरह सुना (समझा) देता है और (ऐ रसूल) जो (कुफ़्फ़ार मुर्दों की तरह) क़ब्रों में हैं उन्हें तुम अपनी (बातें) नहीं समझा सकते हो (22)
तुम तो बस (एक खु़दा से) डराने वाले हो (23)
हम ही ने तुमको यक़ीनन कु़रान के साथ खु़शख़बरी देने वाला और डराने वाला ( पैग़म्बर) बनाकर भेजा और कोई उम्मत (दुनिया में) (24)
ऐसी नहीं गुज़री कि उसके पास (हमारा) डराने वाला पैग़म्बर न आया हो और अगर ये लोग तुम्हें झुठलाएँ तो कुछ परवाह नहीं करो क्योंकि इनके अगलों ने भी (अपने पैग़म्बरों को) झुठलाया है (हालाँकि) उनके पास उनके पैग़म्बर वाज़ेए व रौशन मौजिजे़ और सहीफ़े और रौशन किताब लेकर आए थे (25)
फिर हमने उन लोगों को जो काफि़र हो बैठे ले डाला तो (तुमने देखाकि) मेरा अज़ाब (उन पर) कैसा (सख्त हुआ (26)
अब क्या तुमने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि यक़ीनन खु़दा ही ने आसमान से पानी बरसाया फिर हम (खु़दा) ने उसके ज़रिए से तरह-तरह की रंगतों के फल पैदा किए और पहाड़ों में क़तआत (टुकड़े रास्ते) हैं जिनके रंग मुख़तलिफ है कुछ तो सफेद (बुर्राक़) और कुछ लाल (लाल) और कुछ बिल्कुल काले सियाह (27)
और इसी तरह आदमियों और जानवरों और चारपायों की भी रंगते तरह-तरह की हैं उसके बन्दों में ख़ुदा का ख़ौफ करने वाले तो बस उलेमा हैं बेशक खु़दा (सबसे) ग़ालिब और बख़्शने वाला है (28)
बेशक जो लोग खुदा की किताब पढ़ा करते हैं और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते हैं और जो कुछ हमने उन्हें अता किया है उसमें से छिपा के और दिखा के (खु़दा की राह में) देते हैं वह यक़ीनन ऐसे व्यापार का आसरा रखते हैं (29)
जिसका कभी टाट न उलटेगा ताकि खु़दा उन्हें उनकी मज़दूरियाँ भरपूर अता करे बल्कि अपने फज़ल (व करम) से उसे कुछ और बढ़ा देगा बेशक वह बड़ा बख़्शने वाला है (और) बड़ा क़द्रदान है (30)

27 जनवरी 2026

26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर अख़बारों का अवकाश है , न्यूज़ चैनल में देखता ही नहीं , तो फिर बांग्लादेश में कल और आज क्या हुआ , हमारे हिन्दू भाइयों , सनातनियों पर किया ज़ुल्म हुआ इसकी दर्दनाक खबर के बारे में लेटेस्ट अपडेट तो नहीं

 

26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर अख़बारों का अवकाश है , न्यूज़ चैनल में देखता ही नहीं , तो फिर बांग्लादेश में कल और आज क्या हुआ , हमारे हिन्दू भाइयों , सनातनियों पर किया ज़ुल्म हुआ इसकी दर्दनाक खबर के बारे में लेटेस्ट अपडेट तो नहीं , लेकिन कल तक जो भी बांग्लादेश में होता रहा है , हमारे सनातनी , हिन्दू भाइयों के साथ वहां डंके की चोट पर जो ज़ुल्म , ज़्यादतियां , आग जनी , धार्मिक स्थलों पर उत्पात , का नंगा नाच करके , निर्दोष हिन्दू भाइयों को टारगेट करके , जो उनकी हत्या की जा रही है , वोह दिल हिला देने वाली है ,, मेरे लिए ही नहीं , जो ओरिजनल धर्म वाले हैं , जो भारतीय है , जो मानवाधिकार संवेदनाओं के समर्थक हैं , वोह सब ,, इस तरह के बेरहम क़त्ले आम ,, आगजनी , के खिलाफ दर्द रखते हैं , और हमारे देश की ज़िम्मेद्दारी है के, हमारे सनातनी भाइयों ,, हिन्दू भाइयों की बांग्लादेश में रक्षा करने के लिये, उनकी सुरक्षा के लिए बंगलादेश को ललकारें , देश के साधू संत , देश के मौलवी ,क़ाज़ी , पादरी , ,फादर , ग्रंथी , जेन धर्म गुरु ,हिन्दू , मुस्लिम , सिक्ख , ईसाई ,पारसी , जैन , जो भी हों , जिस समाज के भी धर्मगुरु हों , अगर उनमे ज़रा भी धार्मिक जानकारी है ,, धर्म पर चलने की ज़िम्मेदारी है , ईमानदारी है , समझ है , तो वोह इन हालातों पर , ऐसे क़त्ले आमों के खिलाफ बोलेंगे ज़रूर , यह उनका कर्तव्य है , लेकिन कहाँ है वोह धर्म गुरु , कहाँ है , वोह भारत की संस्कृति , भारत की परम्परा , कहाँ है वोह भारत में बैठे ऐसे लोग , जो किसी भारतीय , किसी भी हिन्दू धर्म , या भारतीय से जुड़े हुए , किसी भी नागरिक पर अगर कोई भी ज़ुल्म ज़्यादती हो तो वोह चीख पढ़ते थे , दखल अंदाज़ी करते थे , आवश्यकता पढ़ने पर , डरते थे , धमकाते थे, अपने लोगों को सुरक्षित रखने के हर सम्भव उपाय करते थे , लेकिन यहां तो देश के अधिकतम लोग पत्थर हो गए है , सरकारी हो गए है , सरकारी सुख सुविधाओं में खो गए है , ऐसे गंभीर मुद्दे , जिसमे भारत के सनातनी धर्म से जुड़े लोगों को टारगेट किया जा रहा है , बेरहमी से क़त्ले आम किया जा रहा है , ऐसे वक़्त पर सरकार की चुप्पी , ,, ऐसे मुद्दों पर मन की कोई बात नहीं ,, कोई दहाड़ नहीं , कोई हमलावर भाषण नहीं , ,क्या फायदा हमारे अरबों खरबों के रक्षा बजट के खर्च का , ,राफेल का ,पनडुब्बियों का ,हमलावर जहाज़ों , बोफोर्स तोपों का ,, के , एक मच्छर जैसा देश , जिसे हमारे देश ने ही आज़ाद कराया , जो हमारे देश के ही रहमो करम पर है , वहां के चंद गुस्ताख़ लोग , हमारे सनातनी भाइयों ,, सनातनी धार्मिक स्थलों पर हमले कर रहे हैं , रोज़ रोज़, किसी ना किसी की हत्या कर रहे हैं , और हत्या भी बेरहमी से , ज़िंदा जला जला कर कर रहे हैं , अरे तुम्हारा खून क्या पानी हो गया है , या सरकारी हो गया है , सरकार तो ना जाने क्यों चुप है , लेकिन एक भारतीय होने के नाते , भारत की संस्कृति से जुड़े लोगों , सनातनी भाइयों , यहां की धार्मिक आस्थाओं से जुड़े धर्म स्थलों को बचाने के लिए क्या हमारी जुबांन हलक़ में अटक गई है , अरे छोडो संघ की बात , छोडो , हिंदूवादी संगठनों की बात , भारत , और भारतीय होने की बात करो , मुस्लिम समाज से जुड़े लोगों, धर्मगुरुओं का भी इन हत्याओं पर दिल क्यों नहीं दहलता है , वोह आवाज़ क्यों बुलंद नहीं करते है , एक बांग्ला देश , जो हमारे देश में घुसपैठ करके , नागरिकों को भेज रहा है , चुनाव प्रभावित कर रहा है , वहां के घुसपैठियों को रोकने के लिए ,, हमारे देश के प्रधानमंत्री , देश के गृह मंत्री , देश का चुनाव आयोग हर तरह से प्रयासरत है , रोज़ भाषण में बांग्लादेशी घुसपैठियों को कोटा से लेकर, देश के हर कोने में चर्चा होती है , एस आई आर , और दुसरे तरीकों पर अरबों अरब रूपये खर्च होते है ,, इसे ही भाजपा चुनावी मुद्दा बनाती है, लेकिन भारत में घुसपैठ करने वाले बांग्ला देश , वोह बांग्ला देश जहाँ हमारे सनातनी भाइयों की रोज़ हत्याएं हो रही हैं , सनातनी धर्म स्थलों को निशाना बनाकर हिंसक घटनाये हो रही है , हमारी सरकार उनके खिलाफ हमारी यह सरकार पंगु क्यों है , एक शब्द भी मन की बात तो छोड़ो , बिना मन की बात क्यों नहीं की गई , अख़बार , न्यूज़ चैनल इस पर क्यों नहीं दहाड़े , धार्मिक गुरु , चाहे किसी भी धर्म के हों , अभी तक चुप क्यों है , अपने अपने मंचो से क्या वोह इस दर्द को बयान नहीं कर सकते , क्या सरकारों की , सरकार में बैठे लोगों की तारीफ करना ही उनकी प्राथमिक ड्यूटी है , देश को जागना होगा , इन घटनाओं पर विराम लगे इसके लिए सरकार के खिलाफ उसे जगाने के प्रयास करना होंगे , सच समझना होगा , सरकार को मजबूर करना होगा के वोह या तो हत्याएं रुकवाए ,बांग्लादेश में सनातनी भाइयों को सुरक्षा दिलवाये , नहीं तो ,,अमेरिका की तरह क़दम उठाये , अपनी फौज , अपने जहाज़ , अपने राफेल , अपनी बोफोर्स जो भी शक्ति है ,वोह बांग्लादेश में लगाकर बांग्लादेश पर क़ब्ज़ा कर ले , और विश्व को बता दे के किसी कोने में अगर भारत की आस्थाओं पर विश्वास रखने वाले लोगों , खासकर सनातनियों की तरफ , किसी भी देश में आँख उठाकर देखें, तो भारत उसकी आँखें निकाल लेगा , लेकिन क्या ऐसा संभव है , क्या हमारे देश में इंद्रा जी जैसे बहादुर योद्धा हैं , अगर हैं , तो फिर सनातनियों की सुरक्षा के लिए जंग करें , उन्हें सुरक्षित करवाएं रोज़ रोज़ अख़बारों में इस तरह की दर्दनाक खबरों से तकलीफ होती है , दर्द होता है ,, और सरकार की चुप्पी पर अफ़सोस होता है , देश के सरकार समर्थक ऐश ओ आराम प्राप्त बाबाओं की बाबागिरी पर निष्पक्षता पर शंकाएं होती है ,, जो असहनीय होता जा रहा है , ,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

पूर्व पार्षद को भार्या शोक,नेत्रदान संपन्न

 पूर्व पार्षद को भार्या शोक,नेत्रदान संपन्न

सेवा कार्यों में सदा अग्रणी रहने वाले, मोहन पैलेस, जैन धर्मशाला रोड,कोटा जंक्शन निवासी पूर्व पार्षद सीताराम शर्मा की धर्मपत्नी का आकस्मिक निधन देर रात रविवार को हो गया था । आशा भी प्रारंभ से ही धर्म कर्म में आस्था रखने वाली व्यवहार कुशल महिला थी ।

आशा के निधन के ठीक उपरांत बेटी रानी,बेटे योगेश,ललित ने पिता सीताराम से माता जी के नेत्रदान करवाने की सहमति प्राप्त की,जिसकी सूचना रात 2:00 बजे संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र मुकेश अग्रवाल को दी गयी ।

मुकेश की सूचना पर संस्था के सहयोग से, अल-सुबह आशा का नेत्रदान परिवार के सभी सदस्यों के बीच संपन्न हुआ

और खु़दा ही ने तुम लोगों को (पहले पहल) मिट्टी से पैदा किया फिर नतफ़े से फिर तुमको जोड़ा (नर मादा) बनाया और बग़ैर उसके इल्म (इजाज़त) के न कोई औरत हमेला होती है और न जनती है और न किसी शख़्स की उम्र में ज़्यादती होती है और न किसी की उम्र से कमी की जाती है मगर वह किताब (लौहे महफूज़) में (ज़रूर) है बेशक ये बात खु़दा पर बहुत ही आसान है

 और खु़दा ही ने तुम लोगों को (पहले पहल) मिट्टी से पैदा किया फिर नतफ़े से फिर तुमको जोड़ा (नर मादा) बनाया और बग़ैर उसके इल्म (इजाज़त) के न कोई औरत हमेला होती है और न जनती है और न किसी शख़्स की उम्र में ज़्यादती होती है और न किसी की उम्र से कमी की जाती है मगर वह किताब (लौहे महफूज़) में (ज़रूर) है बेशक ये बात खु़दा पर बहुत ही आसान है (11)
(उसकी कु़दरत देखो) दो समन्दर बावजूद मिल जाने के यकसाँ नहीं हो जाते ये (एक तो) मीठा खु़श ज़ाएका कि उसका पीना सुवारत है और ये (दूसरा) खारी कडुवा है और (इस इख़तेलाफ पर भी) तुम लोग दोनों से (मछली का) तरो ताज़ा गोश्त (यकसाँ) खाते हो और (अपने लिए ज़ेवरात (मोती वग़ैरह) निकालते हो जिन्हें तुम पहनते हो और तुम देखते हो कि कश्तियां दरिया में (पानी को) फाड़ती चली जाती हैं ताकि उसके फज़्ल (व करम तिजारत) की तलाश करो और ताकि तुम लोग शुक्र करो (12)
वही रात को (बढ़ा के) दिन में दाखि़ल करता है (तो रात बढ़ जाती है) और वही दिन को (बढ़ा के) रात में दाखि़ल करता है (तो दिन बढ़ जाता है और) उसी ने सूरज और चाँद को अपना मुतीइ बना रखा है कि हर एक अपने (अपने) मुअय्यन (तय) वक़्त पर चला करता है वही खु़दा तुम्हारा परवरदिगार है उसी की सलतनत है और उसे छोड़कर जिन माबूदों को तुम पुकारते हो वह छुवारों की गुठली की झिल्ली के बराबर भी तो इख़तेयार नहीं रखते (13)
अगर तुम उनको पुकारो तो वह तुम्हारी पुकार को सुनते नहीं अगर (बिफ़रज़े मुहाल) सुनों भी तो तुम्हारी दुआएँ नहीं कु़बूल कर सकते और क़यामत के दिन तुम्हारे शिर्क से इन्कार कर बैठेंगें और वाकि़फकार (शख़्स की तरह कोई दूसरा उनकी पूरी हालत) तुम्हें बता नहीं सकता (14)
लोगों तुम सब के सब खु़दा के (हर वक़्त) मोहताज हो और (सिर्फ) खु़दा ही (सबसे) बेपरवा सज़ावारे हम्द (व सना) है (15)
अगर वह चाहे तो तुम लोगों को (अदम के पर्दे में) ले जाए और एक नयी खि़लक़त ला बसाए (16)
और ये कुछ खु़दा के वास्ते दुशवार नहीं (17)
और याद रहे कि कोई शख़्स किसी दूसरे (के गुनाह) का बोझ नहीं उठाएगा और अगर कोई (अपने गुनाहों का) भारी बोझ उठाने वाला अपना बोझ उठाने के वास्ते (किसी को) बुलाएगा तो उसके बारे में से कुछ भी उठाया न जाएगा अगरचे (कोई किसी का) कराबतदार ही (क्यों न) हो (ऐ रसूल) तुम तो बस उन्हीं लोगों को डरा सकते हो जो बे देखे भाले अपने परवरदिगार का ख़ौफ रखते हैं और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते हैं और (याद रखो कि) जो शख़्स पाक साफ रहता है वह अपने ही फ़ायदे के वास्ते पाक साफ रहता है और (आखि़रकार सबको हिरफिर के) खु़दा ही की तरफ जाना है (18)
और अन्धा (क़ाफिर) और आँखों वाला (मोमिन किसी तरह) बराबर नहीं हो सकते (19)
और न अंधेरा (कुफ्र) और उजाला (ईमान) बराबर है (20)

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