आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
28 जनवरी 2026
संदीप सोरल प्रदेश कोंग्रेस खेल प्रकोष्ठ में प्रदेश महासचिव नियुक्त
और न छाँव (बेहिश्त) और धूप (दोज़ख़ बराबर है)
और न छाँव (बेहिश्त) और धूप (दोज़ख़ बराबर है) (21)
और न जि़न्दे (मोमिनीन) और न मुर्दें (क़ाफिर) बराबर हो सकते हैं और
खु़दा जिसे चाहता है अच्छी तरह सुना (समझा) देता है और (ऐ रसूल) जो
(कुफ़्फ़ार मुर्दों की तरह) क़ब्रों में हैं उन्हें तुम अपनी (बातें) नहीं
समझा सकते हो (22)
तुम तो बस (एक खु़दा से) डराने वाले हो (23)
हम ही ने तुमको यक़ीनन कु़रान के साथ खु़शख़बरी देने वाला और डराने वाला ( पैग़म्बर) बनाकर भेजा और कोई उम्मत (दुनिया में) (24)
ऐसी नहीं गुज़री कि उसके पास (हमारा) डराने वाला पैग़म्बर न आया हो और
अगर ये लोग तुम्हें झुठलाएँ तो कुछ परवाह नहीं करो क्योंकि इनके अगलों ने
भी (अपने पैग़म्बरों को) झुठलाया है (हालाँकि) उनके पास उनके पैग़म्बर
वाज़ेए व रौशन मौजिजे़ और सहीफ़े और रौशन किताब लेकर आए थे (25)
फिर हमने उन लोगों को जो काफि़र हो बैठे ले डाला तो (तुमने देखाकि) मेरा अज़ाब (उन पर) कैसा (सख्त हुआ (26)
अब क्या तुमने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि यक़ीनन खु़दा ही ने आसमान से
पानी बरसाया फिर हम (खु़दा) ने उसके ज़रिए से तरह-तरह की रंगतों के फल पैदा
किए और पहाड़ों में क़तआत (टुकड़े रास्ते) हैं जिनके रंग मुख़तलिफ है कुछ
तो सफेद (बुर्राक़) और कुछ लाल (लाल) और कुछ बिल्कुल काले सियाह (27)
और इसी तरह आदमियों और जानवरों और चारपायों की भी रंगते तरह-तरह की हैं
उसके बन्दों में ख़ुदा का ख़ौफ करने वाले तो बस उलेमा हैं बेशक खु़दा
(सबसे) ग़ालिब और बख़्शने वाला है (28)
बेशक जो लोग खुदा की किताब पढ़ा करते हैं और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते हैं
और जो कुछ हमने उन्हें अता किया है उसमें से छिपा के और दिखा के (खु़दा की
राह में) देते हैं वह यक़ीनन ऐसे व्यापार का आसरा रखते हैं (29)
जिसका कभी टाट न उलटेगा ताकि खु़दा उन्हें उनकी मज़दूरियाँ भरपूर अता करे
बल्कि अपने फज़ल (व करम) से उसे कुछ और बढ़ा देगा बेशक वह बड़ा बख़्शने
वाला है (और) बड़ा क़द्रदान है (30)
27 जनवरी 2026
26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर अख़बारों का अवकाश है , न्यूज़ चैनल में देखता ही नहीं , तो फिर बांग्लादेश में कल और आज क्या हुआ , हमारे हिन्दू भाइयों , सनातनियों पर किया ज़ुल्म हुआ इसकी दर्दनाक खबर के बारे में लेटेस्ट अपडेट तो नहीं
पूर्व पार्षद को भार्या शोक,नेत्रदान संपन्न
पूर्व पार्षद को भार्या शोक,नेत्रदान संपन्न
सेवा कार्यों में सदा
अग्रणी रहने वाले, मोहन पैलेस, जैन धर्मशाला रोड,कोटा जंक्शन निवासी पूर्व
पार्षद सीताराम शर्मा की धर्मपत्नी का आकस्मिक निधन देर रात रविवार को हो
गया था । आशा भी प्रारंभ से ही धर्म कर्म में आस्था रखने वाली व्यवहार कुशल
महिला थी ।
आशा के निधन के ठीक उपरांत बेटी रानी,बेटे योगेश,ललित
ने पिता सीताराम से माता जी के नेत्रदान करवाने की सहमति प्राप्त की,जिसकी
सूचना रात 2:00 बजे संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र मुकेश
अग्रवाल को दी गयी ।
मुकेश की सूचना पर संस्था के सहयोग से, अल-सुबह आशा का नेत्रदान परिवार के सभी सदस्यों के बीच संपन्न हुआ
और खु़दा ही ने तुम लोगों को (पहले पहल) मिट्टी से पैदा किया फिर नतफ़े से फिर तुमको जोड़ा (नर मादा) बनाया और बग़ैर उसके इल्म (इजाज़त) के न कोई औरत हमेला होती है और न जनती है और न किसी शख़्स की उम्र में ज़्यादती होती है और न किसी की उम्र से कमी की जाती है मगर वह किताब (लौहे महफूज़) में (ज़रूर) है बेशक ये बात खु़दा पर बहुत ही आसान है
और खु़दा ही ने तुम लोगों को (पहले पहल) मिट्टी से पैदा किया फिर नतफ़े से
फिर तुमको जोड़ा (नर मादा) बनाया और बग़ैर उसके इल्म (इजाज़त) के न कोई औरत
हमेला होती है और न जनती है और न किसी शख़्स की उम्र में ज़्यादती होती है
और न किसी की उम्र से कमी की जाती है मगर वह किताब (लौहे महफूज़) में
(ज़रूर) है बेशक ये बात खु़दा पर बहुत ही आसान है (11)
(उसकी कु़दरत देखो) दो समन्दर बावजूद मिल जाने के यकसाँ नहीं हो जाते ये
(एक तो) मीठा खु़श ज़ाएका कि उसका पीना सुवारत है और ये (दूसरा) खारी कडुवा
है और (इस इख़तेलाफ पर भी) तुम लोग दोनों से (मछली का) तरो ताज़ा गोश्त
(यकसाँ) खाते हो और (अपने लिए ज़ेवरात (मोती वग़ैरह) निकालते हो जिन्हें
तुम पहनते हो और तुम देखते हो कि कश्तियां दरिया में (पानी को) फाड़ती चली
जाती हैं ताकि उसके फज़्ल (व करम तिजारत) की तलाश करो और ताकि तुम लोग
शुक्र करो (12)
वही रात को (बढ़ा के) दिन में दाखि़ल करता है (तो रात बढ़ जाती है) और
वही दिन को (बढ़ा के) रात में दाखि़ल करता है (तो दिन बढ़ जाता है और) उसी
ने सूरज और चाँद को अपना मुतीइ बना रखा है कि हर एक अपने (अपने) मुअय्यन
(तय) वक़्त पर चला करता है वही खु़दा तुम्हारा परवरदिगार है उसी की सलतनत
है और उसे छोड़कर जिन माबूदों को तुम पुकारते हो वह छुवारों की गुठली की
झिल्ली के बराबर भी तो इख़तेयार नहीं रखते (13)
अगर तुम उनको पुकारो तो वह तुम्हारी पुकार को सुनते नहीं अगर (बिफ़रज़े
मुहाल) सुनों भी तो तुम्हारी दुआएँ नहीं कु़बूल कर सकते और क़यामत के दिन
तुम्हारे शिर्क से इन्कार कर बैठेंगें और वाकि़फकार (शख़्स की तरह कोई
दूसरा उनकी पूरी हालत) तुम्हें बता नहीं सकता (14)
लोगों तुम सब के सब खु़दा के (हर वक़्त) मोहताज हो और (सिर्फ) खु़दा ही (सबसे) बेपरवा सज़ावारे हम्द (व सना) है (15)
अगर वह चाहे तो तुम लोगों को (अदम के पर्दे में) ले जाए और एक नयी खि़लक़त ला बसाए (16)
और ये कुछ खु़दा के वास्ते दुशवार नहीं (17)
और याद रहे कि कोई शख़्स किसी दूसरे (के गुनाह) का बोझ नहीं उठाएगा और
अगर कोई (अपने गुनाहों का) भारी बोझ उठाने वाला अपना बोझ उठाने के वास्ते
(किसी को) बुलाएगा तो उसके बारे में से कुछ भी उठाया न जाएगा अगरचे (कोई
किसी का) कराबतदार ही (क्यों न) हो (ऐ रसूल) तुम तो बस उन्हीं लोगों को डरा
सकते हो जो बे देखे भाले अपने परवरदिगार का ख़ौफ रखते हैं और पाबन्दी से
नमाज़ पढ़ते हैं और (याद रखो कि) जो शख़्स पाक साफ रहता है वह अपने ही
फ़ायदे के वास्ते पाक साफ रहता है और (आखि़रकार सबको हिरफिर के) खु़दा ही
की तरफ जाना है (18)
और अन्धा (क़ाफिर) और आँखों वाला (मोमिन किसी तरह) बराबर नहीं हो सकते (19)
और न अंधेरा (कुफ्र) और उजाला (ईमान) बराबर है (20)
